Articles
Recent Hindi Articles posts -->
अनमोल रिश्ता
यह क्हानी है- गाँव विचारपुर की जो आशीष घोड़ेला के खवाबो की दुनिया मे बसा है। इस गाँव मे अनेको परिवार रहते थे। उनमे से एक परिवार मे केवल दो भाई-बहन थे। जिनके माता-पिता पहले मर चुके हैँ। इन दौनो भाई बहन मे बहुत गहरा प्यार था। भाई का नाम रामकिश्न व बहन का नाम शकुंतला था। रामकिशन फौज मे भर्ती था और उसकी बहन शकुतंला घर पर कपड़े सीलती थी। रामकिश्न प्रतयेक रक्षाबंधन के त्यौहार पर घर जरुर आता और बहऩ शँकुतंला से राखी बँधवाता था। अनेको वर्ष ऐसे बित गए। वह भाई ऐसे ही रक्षाबँधन पर घर आता रहा और दोनौ भाई-बहन खुशी-खुशी जीवन यापन करते रहे।
परँतु इस बार कुछ अलग हुआ कि रामकिशन रक्षाबँधन के दिन घर आने के लिए तैयार हुआ कि अचानक शत्रु ने देश पर आक्रमण कर दिया। रामकिशन ने सोचा कि देश को छोड़ घर चल। लेकिन दुसरे ही क्षण उसके विचार बदल गए। उसने सोचा कि "राष्ट्र मेरा घर और धरती मेरी माँ" इसलिए पहले माँ की पुकार सुनुगाँ और युद्ध मे कुद पड़ा। बम-बारुद चलते रहेँ। गोलियाँ बरसती रही। सुबह से शाम हो गई पर युद्द बंद होने का नाम ही नहिँ ले रहा था। फिर रामकिशन ने सोचा कि घर लेट होने का कारण शत्रु है।
दुसरी तरफ शकुतंला अपने भाई के इंतजार मे सुबह से प्रयेक बस मे रामकिशन को ढुढ़ं रही थी। रामकिशन के इंतजार मे उसने खाना-पीना छोड़ दिया पर इंतजार करते-करते उसकी आँखेँ नहीँ थकी। वह सारा काम छोड़कर भाई का इंतजार करती रही।
दुसरी तरफ बहन से मिलने को बेताब रामकिशन युद्द मे उलझा रहा। फिर अचानक उसमे बहन से मिलने की उमँग दौड़ी और वह खौफनाक ढ़गँ से शत्रु की तरफ बढ़ा। शत्रुऔँ ने उसे काफी जख्म दिए पर वह अपने साथियोँ के साथ आगे बढ़ता रहा। अंत मे उसके साहस के आगे शत्रु सेना ने गुटने टेक दिए। फिर उनके जख्मो पर पट्टियां की तथा रामकिशन घर चलने लगा तो उनके कप्तान ने उसे आराम करने की सलाह दी। पर रामकिश्न ने एक न सुनी। क्योँकि उसे बहन से जो मिलना था। यह देख कैप्टन ने उसे मैड़ल प्रदान किया और रामकिश्न घर चल दिया।
उधर उसकी बहन भाई के इंतजार मे बसे निहार रही थी। फिर बस रुकी और उसमे से अचानक रामकिशन उतरा, भाई को देखकर शकुतंला दौड़ी-दौड़ी भाई के पास आई और भाई के गले लग गई। दोनौ की आँखोँ मे आँसू खुशी के आँशु आ गए। आँसू पोंछकर शकुतंला ने राखी बाँधी और देरी से आने का कारण पुछा।
तो रामकिशन ने जख्म दिखा दिए। शकुतँला सब समझ गई तथा अपने भैया को गले लगाकर रोने लगी। रामकिशन ने उसे चुप कराकर क्हा कि पगली ये जखम नहीँ गौरव के प्रतिक है।
इस तरह से उन्होने रक्षा-बँधन का त्यौहार मनाया और अपने घर मे खुशी-खुशी चले गए और शाबित कर दिया कि भाई-बहन का प्रेम बहुत अनमोल है॥
Writer: Ashish Ghorela
>>
429
Too Many Requests
You have sent too many requests in a given amount of time. Please slow down and try again later.
Try Again Share to:
facebook
twitter
Google
Visitor:


very nice